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सम्पूर्ण विश्व को कौमी एकता का संदेश देने वाले महान समाज सुधारक संत "कबीर" जी की जयंती आज उनके परिनिर्वाण स्थली मगहर में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। जयंती के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे नगर पालिका परिषद खलीलाबाद के अध्यक्ष जगत जायसवाल ने विश्व प्रसिद्ध सूफी संत कबीर की समाधि और मजार पर माथा टेक सभी कबीर पंथियों को कबीर जयंती की बधाई दी। इस दौरान महंत विचार दास के अलावा कई संत और संतो के शिष्य तथा बड़ी संख्या में कबीर पंथी उपस्थित रहे। कबीर जयंती के अवसर पर अपने संबोधन में चेयरमैन जगत जायसवाल ने कहा कि संत कबीर जी की रचनाएं रूढ़ियों को तोड़ने वाली है। कबीर ने भेदभाव और अंधविश्वास के खिलाफ आवाज उठाई। चेयरमैन जगत जायसवाल ने कहा कि अल्हड़, फक्कड़, बेबाक जनकवि कबीर की रचनाएं रूढ़ियों को तोड़ती मुक्त आत्मा की कविता है। उनकी भाषा में सरलता, सादगी व मानवता का मूल मंत्र है। उन्होंने कहा कि कबीर ने जिस बात को जिस रूप में प्रकट करना चाहा, उसी रूप में भाषा से कहलवाया। चेयरमैन ने कहा कि कबीर ने भेदभाव, आडंबर, विषमता व कट्टरता के खिलाफ मुखर संदेश दिया है। श्री जायसवाल ने कहा कि कबीर धार्मिक आडंबरों, रूढ़ियों, अंधविश्वासों के कट्टर विरोधी थे। उन्होंने कहा कि कबीर संत, समाज-सुधारक के साथ भारत की बौद्धिक विरासत के ऐसे युगपुरुष हैं, जिन्होंने ज्ञान के जरिए जाति, धर्म और पाखंड के खिलाफ आवाज उठाई। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जिस तरह बुद्ध ने करुणा को धर्म का स्तंभ बनाया, वैसे ही कबीर ने प्रेम और सदगुरु को आत्मिक विमर्श का विषय बनाते हुए समाज को जोड़ने की भूमिका निभाई।

परिणिर्वाण स्थली पर माथा टेक चेयरमैन ने कबीर पंथियों को दी जयंती की बधाई 

सम्पूर्ण विश्व को कौमी एकता का संदेश देने वाले महान समाज सुधारक संत “कबीर” जी की जयंती आज उनके परिनिर्वाण स्थली मगहर में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। जयंती के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे नगर पालिका परिषद खलीलाबाद के अध्यक्ष जगत जायसवाल ने विश्व प्रसिद्ध सूफी संत कबीर की समाधि और मजार पर माथा टेक सभी कबीर पंथियों को कबीर जयंती की बधाई दी। इस दौरान महंत विचार दास के अलावा कई संत और संतो के शिष्य तथा बड़ी संख्या में कबीर पंथी उपस्थित रहे। कबीर जयंती के अवसर पर अपने संबोधन में चेयरमैन जगत जायसवाल ने कहा कि संत कबीर जी की रचनाएं रूढ़ियों को तोड़ने वाली है। कबीर ने भेदभाव और अंधविश्वास के खिलाफ आवाज उठाई। चेयरमैन जगत जायसवाल ने कहा कि अल्हड़, फक्कड़, बेबाक जनकवि कबीर की रचनाएं रूढ़ियों को तोड़ती मुक्त आत्मा की कविता है। उनकी भाषा में सरलता, सादगी व मानवता का मूल मंत्र है। उन्होंने कहा कि कबीर ने जिस बात को जिस रूप में प्रकट करना चाहा, उसी रूप में भाषा से कहलवाया। चेयरमैन ने कहा कि कबीर ने भेदभाव, आडंबर, विषमता व कट्टरता के खिलाफ मुखर संदेश दिया है। श्री जायसवाल ने कहा कि कबीर धार्मिक आडंबरों, रूढ़ियों, अंधविश्वासों के कट्टर विरोधी थे। उन्होंने कहा कि कबीर संत, समाज-सुधारक के साथ भारत की बौद्धिक विरासत के ऐसे युगपुरुष हैं, जिन्होंने ज्ञान के जरिए जाति, धर्म और पाखंड के खिलाफ आवाज उठाई। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जिस तरह बुद्ध ने करुणा को धर्म का स्तंभ बनाया, वैसे ही कबीर ने प्रेम और सदगुरु को आत्मिक विमर्श का विषय बनाते हुए समाज को जोड़ने की भूमिका निभाई।

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