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कठिनईया रिवर फ्रंट परियोजना निरस्त, ब्याज सहित लौटाने पड़ेंगे करोड़ों रुपए!
संतकबीरनगर जिले में कठिनईया नदी की धारा को अवैध रूप से बदलने के प्रयास में शुरू की गई "कठिनईया रिवर फ्रंट परियोजना" को उत्तर प्रदेश शासन ने पूरी तरह से निरस्त कर दिया है। इस प्रोजेक्ट पर खर्च हुए 3.55 करोड़ रुपये को ब्याज सहित वापस करने का भी आदेश दिया गया है। ग्रामीणों के अथक विरोध और शिकायतों के बाद यह बड़ी कार्रवाई की गई है।
ग्रामीणों का विरोध और सरकारी भूमि पर कब्ज़ा की शिकायत का शासन ने लिया संज्ञान 
नगर पंचायत हरिहरपुर स्थित राजघाट पुल के समीप कठिनईया नदी के किनारे जंगल की भूमि पर अवैध कब्जे और बिना शासनादेश के नदी की धारा बदलने को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश था। हरिओम वर्मा, गंगा पटवा, प्रकाश उर्फ दीपू, रामबचन, ओकारनाथ, कैलाश, शिव शंभू, रामचरित, संजय, रामबचन, भोला, दयाराम, उमेश, जमुना सहित कई ग्रामीणों ने बीते दिनों जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया था।
ग्रामीणों का आरोप था कि नगर पंचायत हरिहरपुर के राजघाट पुल के पास जंगल की भूमि पर पार्क बाउंड्री, पुल, स्ट्रीट लाइट आदि के माध्यम से कब्जा किया जा रहा है। राजस्व अभिलेखों में यह भूमि जंगल के नाम से दर्ज है। पोकलैंड मशीन लगाकर लगभग 50 मीटर जमीन को पाटा जा रहा था और नदी की धारा को बदला जा रहा था।ग्रामीणों ने डीएम के अलावा मंडलायुक्त, प्रमुख सचिव राजस्व परिषद, प्रमुख सचिव नगर विकास, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को भी शिकायती पत्र भेजे थे।
"शाही" प्रोजेक्ट पर सवाल: पर्यटन विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत
जानकारी के अनुसार, संतकबीरनगर के मुकुंदपुर नार्थ रिवर फ्रंट के किनारे का पर्यटन विकास तथा नाथनगर टिकुईकोल के उत्तर बाबा लक्ष्मी दास कुटी का पर्यटन विकास, रिटेनिंग वाल, पौधरोपण, चहरदीवारी, प्रकाश व्यवस्था, जल संरक्षण एवं अन्य विकास कार्य और सौंदर्यीकरण कार्य के लिए शासन ने करोड़ों रुपये की मंजूरी दी थी। पर्यटन विभाग की तरफ से कठिनईया रिवर फ्रंट का निर्माण भी शुरू हो गया था।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पर्यटन विभाग की मिलीभगत से संबंधित ठेकेदार ने बिना आवश्यक एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) लिए ही कठिनईया नदी की धारा को परिवर्तित करना शुरू कर दिया। ग्रामीणों की शिकायत पर शासन ने पहले भी रोक लगाने का आदेश दिया था, लेकिन कथित रूप से दबंग ठेकेदार ने विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से निर्माण कार्य जारी रखा।
शासन का कड़ा रुख: परियोजना निरस्त, धनराशि वापसी का आदेश
ग्रामीणों की लगातार शिकायतों और दूसरी बार शासन के कड़े रुख के बाद जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एसडीएम डॉ. सुनील कुमार के नेतृत्व में राजस्व टीम, पर्यटन विभाग और महुली पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और निर्माण कार्य को तत्काल रोक दिया गया।
उत्तर प्रदेश शासन के उप सचिव संजीव कुमार श्रीवास्तव ने 10 जुलाई को पर्यटन विभाग उत्तर प्रदेश के महानिदेशक को पत्र भेजकर समूची कठिनईया रिवर फ्रंट परियोजना को निरस्त किए जाने की जानकारी दी। साथ ही, उप सचिव ने इस परियोजना पर अब तक अवमुक्त हुई 3.55 करोड़ रुपये की धनराशि को ब्याज सहित शासन के खाते में जमा कराकर अवगत कराने का भी निर्देश जारी किया है।
ग्रामीणों में खुशी की लहर: "नदी की धारा बर्बाद करने वालों पर हो कार्रवाई"
शासन की इस बड़ी कार्रवाई से ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई है। उन्होंने इस फैसले का स्वागत करते हुए मांग की है कि नदी की धारा को अवैध रूप से बर्बाद करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

“चले थे नदी की धार मोड़ने” ! तेज बहाव में बह गया “शाही” प्रोजेक्ट

कठिनईया रिवर फ्रंट परियोजना निरस्त, ब्याज सहित लौटाने पड़ेंगे करोड़ों रुपए!
संतकबीरनगर जिले में कठिनईया नदी की धारा को अवैध रूप से बदलने के प्रयास में शुरू की गई “कठिनईया रिवर फ्रंट परियोजना” को उत्तर प्रदेश शासन ने पूरी तरह से निरस्त कर दिया है। इस प्रोजेक्ट पर खर्च हुए 3.55 करोड़ रुपये को ब्याज सहित वापस करने का भी आदेश दिया गया है। ग्रामीणों के अथक विरोध और शिकायतों के बाद यह बड़ी कार्रवाई की गई है।
ग्रामीणों का विरोध और सरकारी भूमि पर कब्ज़ा की शिकायत का शासन ने लिया संज्ञान 
नगर पंचायत हरिहरपुर स्थित राजघाट पुल के समीप कठिनईया नदी के किनारे जंगल की भूमि पर अवैध कब्जे और बिना शासनादेश के नदी की धारा बदलने को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश था। हरिओम वर्मा, गंगा पटवा, प्रकाश उर्फ दीपू, रामबचन, ओकारनाथ, कैलाश, शिव शंभू, रामचरित, संजय, रामबचन, भोला, दयाराम, उमेश, जमुना सहित कई ग्रामीणों ने बीते दिनों जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया था।
ग्रामीणों का आरोप था कि नगर पंचायत हरिहरपुर के राजघाट पुल के पास जंगल की भूमि पर पार्क बाउंड्री, पुल, स्ट्रीट लाइट आदि के माध्यम से कब्जा किया जा रहा है। राजस्व अभिलेखों में यह भूमि जंगल के नाम से दर्ज है। पोकलैंड मशीन लगाकर लगभग 50 मीटर जमीन को पाटा जा रहा था और नदी की धारा को बदला जा रहा था।ग्रामीणों ने डीएम के अलावा मंडलायुक्त, प्रमुख सचिव राजस्व परिषद, प्रमुख सचिव नगर विकास, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को भी शिकायती पत्र भेजे थे।
“शाही” प्रोजेक्ट पर सवाल: पर्यटन विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत
जानकारी के अनुसार, संतकबीरनगर के मुकुंदपुर नार्थ रिवर फ्रंट के किनारे का पर्यटन विकास तथा नाथनगर टिकुईकोल के उत्तर बाबा लक्ष्मी दास कुटी का पर्यटन विकास, रिटेनिंग वाल, पौधरोपण, चहरदीवारी, प्रकाश व्यवस्था, जल संरक्षण एवं अन्य विकास कार्य और सौंदर्यीकरण कार्य के लिए शासन ने करोड़ों रुपये की मंजूरी दी थी। पर्यटन विभाग की तरफ से कठिनईया रिवर फ्रंट का निर्माण भी शुरू हो गया था।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पर्यटन विभाग की मिलीभगत से संबंधित ठेकेदार ने बिना आवश्यक एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) लिए ही कठिनईया नदी की धारा को परिवर्तित करना शुरू कर दिया। ग्रामीणों की शिकायत पर शासन ने पहले भी रोक लगाने का आदेश दिया था, लेकिन कथित रूप से दबंग ठेकेदार ने विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से निर्माण कार्य जारी रखा।
शासन का कड़ा रुख: परियोजना निरस्त, धनराशि वापसी का आदेश
ग्रामीणों की लगातार शिकायतों और दूसरी बार शासन के कड़े रुख के बाद जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एसडीएम डॉ. सुनील कुमार के नेतृत्व में राजस्व टीम, पर्यटन विभाग और महुली पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और निर्माण कार्य को तत्काल रोक दिया गया।
उत्तर प्रदेश शासन के उप सचिव संजीव कुमार श्रीवास्तव ने 10 जुलाई को पर्यटन विभाग उत्तर प्रदेश के महानिदेशक को पत्र भेजकर समूची कठिनईया रिवर फ्रंट परियोजना को निरस्त किए जाने की जानकारी दी। साथ ही, उप सचिव ने इस परियोजना पर अब तक अवमुक्त हुई 3.55 करोड़ रुपये की धनराशि को ब्याज सहित शासन के खाते में जमा कराकर अवगत कराने का भी निर्देश जारी किया है।
ग्रामीणों में खुशी की लहर: “नदी की धारा बर्बाद करने वालों पर हो कार्रवाई”
शासन की इस बड़ी कार्रवाई से ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई है। उन्होंने इस फैसले का स्वागत करते हुए मांग की है कि नदी की धारा को अवैध रूप से बर्बाद करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

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