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सत्यमेव टाइम्स में आपका स्वागत है   संतकबीरनगर- सेमिरयावां ब्लॉक में क्षेत्र पंचायत की बैठकों में गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए पूर्व ब्लॉक प्रमुख महमूद अहमद और पूर्व ग्राम प्रधान खम्बरिया विकास चौधरी ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से शिकायत की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि खंड विकास अधिकारी (BDO) और ब्लॉक प्रमुख की मिलीभगत से पिछले एक साल से क्षेत्र पंचायत की कोई भी निर्धारित बैठक नहीं हुई है, जो कि शासनादेश का उल्लंघन है। 21 नवंबर 2024 की बैठक पर उठे गंभीर सवाल शिकायत में विशेष रूप से 21 नवंबर 2024 को आयोजित एक बैठक का हवाला दिया गया है, जिसे श्री अहमद ने "फर्जी" करार दिया है। उनके अनुसार, इस बैठक में गणपूर्ति (कोरम) पूरा नहीं था, फिर भी दबावपूर्वक और अवैध तरीके से क्षेत्र पंचायत की कार्ययोजना पारित कर दी गई। श्री अहमद एवं श्री चौधरी ने इस बैठक में कई गंभीर खामियां गिनाई हैं: स्थायी कर्मचारियों की अनुपस्थिति: बैठक में ब्लॉक का कोई भी स्थायी कर्मचारी मौजूद नहीं था। अधिकारियों की गैर-मौजूदगी: जनपद स्तर का कोई भी अधिकारी (जैसे CDO, BDO, ADO आदि) उपस्थित नहीं था। जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति: माननीय विधायक, सांसद, जिला पंचायत सदस्य या अन्य कोई भी प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित नहीं था। दबावपूर्ण अनुमोदन: आरोप है कि बैठक की प्रक्रिया को दबाव में और बिना वैध संख्या बल के संपन्न कर फर्जी तरीके से कार्ययोजना को पारित किया गया। इन अनियमितताओं से यह संकेत मिलता है कि खंड विकास अधिकारी और ब्लॉक प्रमुख द्वारा धन का दुरुपयोग करने और विकास योजनाओं में भ्रष्टाचार करने की मंशा से काम किया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री से तत्काल कार्रवाई की मांग पूर्व ब्लॉक प्रमुख महमूद अहमद ने उपमुख्यमंत्री से इस गंभीर मामले में तत्काल हस्तक्षेप और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं: जांच: 21 नवंबर 2024 की बैठक से संबंधित सभी कार्यवाही रजिस्टर और दस्तावेजों को तत्काल मंगवाकर गहन जांच कराई जाए। सत्यापन सूची: उस बैठक में उपस्थित क्षेत्र पंचायत सदस्यों, ग्राम प्रधानों, जिला पंचायत सदस्यों, विधायकों और अन्य अधिकारियों की सत्यापन सूची जारी की जाए। बैठक का रद्दकरण और नई बैठक: फर्जी अनुमोदन को रद्द कर शासनादेश के अनुसार तत्काल एक नई बैठक बुलाई जाए। अनुशासनात्मक कार्रवाई: इस प्रकरण में संलिप्त अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। ऑडिट: अब तक के सभी विकास कार्यों, योजनाओं और बजट व्यय का व्यापक ऑडिट कराया जाए। श्री अहमद ने अपनी शिकायत के साथ संबंधित साक्ष्य भी संलग्न किए हैं और उम्मीद जताई है कि उपमुख्यमंत्री इस मामले की निष्पक्ष जांच कराकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया और पारदर्शिता की रक्षा करेंगे। इस शिकायत से सेमिरयावां ब्लॉक में स्थानीय शासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिस पर उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता है।

DCM से शिकायत: सेमरियावां में क्षे० पं० बैठक में अनियमितता और भ्रष्टाचार का आरोप

 

संतकबीरनगर– सेमिरयावां ब्लॉक में क्षेत्र पंचायत की बैठकों में गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए पूर्व ब्लॉक प्रमुख महमूद अहमद और पूर्व ग्राम प्रधान खम्बरिया विकास चौधरी ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से शिकायत की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि खंड विकास अधिकारी (BDO) और ब्लॉक प्रमुख की मिलीभगत से पिछले एक साल से क्षेत्र पंचायत की कोई भी निर्धारित बैठक नहीं हुई है, जो कि शासनादेश का उल्लंघन है।

21 नवंबर 2024 की बैठक पर उठे गंभीर सवाल

शिकायत में विशेष रूप से 21 नवंबर 2024 को आयोजित एक बैठक का हवाला दिया गया है, जिसे श्री अहमद ने “फर्जी” करार दिया है। उनके अनुसार, इस बैठक में गणपूर्ति (कोरम) पूरा नहीं था, फिर भी दबावपूर्वक और अवैध तरीके से क्षेत्र पंचायत की कार्ययोजना पारित कर दी गई।

श्री अहमद एवं श्री चौधरी ने इस बैठक में कई गंभीर खामियां गिनाई हैं:

स्थायी कर्मचारियों की अनुपस्थिति: बैठक में ब्लॉक का कोई भी स्थायी कर्मचारी मौजूद नहीं था।
अधिकारियों की गैर-मौजूदगी: जनपद स्तर का कोई भी अधिकारी (जैसे CDO, BDO, ADO आदि) उपस्थित नहीं था।
जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति: माननीय विधायक, सांसद, जिला पंचायत सदस्य या अन्य कोई भी प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित नहीं था।

दबावपूर्ण अनुमोदन: आरोप है कि बैठक की प्रक्रिया को दबाव में और बिना वैध संख्या बल के संपन्न कर फर्जी तरीके से कार्ययोजना को पारित किया गया।
इन अनियमितताओं से यह संकेत मिलता है कि खंड विकास अधिकारी और ब्लॉक प्रमुख द्वारा धन का दुरुपयोग करने और विकास योजनाओं में भ्रष्टाचार करने की मंशा से काम किया जा रहा है।
उपमुख्यमंत्री से तत्काल कार्रवाई की मांग
पूर्व ब्लॉक प्रमुख महमूद अहमद ने उपमुख्यमंत्री से इस गंभीर मामले में तत्काल हस्तक्षेप और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
जांच: 21 नवंबर 2024 की बैठक से संबंधित सभी कार्यवाही रजिस्टर और दस्तावेजों को तत्काल मंगवाकर गहन जांच कराई जाए।
सत्यापन सूची: उस बैठक में उपस्थित क्षेत्र पंचायत सदस्यों, ग्राम प्रधानों, जिला पंचायत सदस्यों, विधायकों और अन्य अधिकारियों की सत्यापन सूची जारी की जाए।

बैठक का रद्दकरण और नई बैठक: फर्जी अनुमोदन को रद्द कर शासनादेश के अनुसार तत्काल एक नई बैठक बुलाई जाए।

अनुशासनात्मक कार्रवाई: इस प्रकरण में संलिप्त अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
ऑडिट: अब तक के सभी विकास कार्यों, योजनाओं और बजट व्यय का व्यापक ऑडिट कराया जाए।
श्री अहमद ने अपनी शिकायत के साथ संबंधित साक्ष्य भी संलग्न किए हैं और उम्मीद जताई है कि उपमुख्यमंत्री इस मामले की निष्पक्ष जांच कराकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया और पारदर्शिता की रक्षा करेंगे। इस शिकायत से सेमिरयावां ब्लॉक में स्थानीय शासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिस पर उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता है।

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