संतकबीरनगर।
“परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्…”
पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के व्हाट्सएप प्रोफाइल पर भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर और ‘अबाउट’ में दर्ज यह श्लोक इन दिनों चर्चा में है। इसके भाव को समझने वाला जानता है कि इसमें एक ओर संरक्षण का संदेश है तो दूसरी ओर दुष्कर्म के विरुद्ध कार्रवाई का संकल्प। धार्मिक संदर्भ अपनी जगह है, लेकिन कानून-व्यवस्था के आईने में देखें तो इसका प्रतीकात्मक अर्थ साफ है कि पीड़ित को सुरक्षा और अपराध के आरोपी को कानून के सामने जवाबदेही।
ख़बर पहलवान ब्रह्मानन्द यादव हत्याकांड से जुड़ा है जिसमें पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने इसी संदेश को सामने ला दिया है। गौरतलब हो कि 22 सितंबर को कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र के भकठान गोसाईपुर में ब्रह्मानन्द यादव को रास्ते में रोककर हमला किए जाने की घटना सामने आई थी. पुलिस के मुताबिक हमलावरों ने पहले उनकी आंखों में लाल मिर्च पाउडर डाला और फिर लाठी-डंडों तथा लोहे की गैंती से हमला किया। गंभीर रूप से घायल ब्रह्मानन्द को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हत्या की खबर से क्षेत्र में आक्रोश फैल गया। पुलिस के सामने चुनौती थी कि वारदात में शामिल आरोपियों तक जल्द पहुंचा जाए। एसपी संदीप मीना के निर्देशन में कोतवाली खलीलाबाद पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम सक्रिय हुई और पुलिस के अनुसार 24 घंटे के भीतर पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों में अभिमन्यु यादव, अजय यादव, रामस्वरूप यादव, संजय यादव और राकेश यादव शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक चार आरोपियों को बयारा रोड स्थित मंझरिया रेलवे क्रासिंग के पास पकड़ा गया, जबकि राकेश यादव को महाराजगंज से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर चार बांस के डंडे, लोहे की गैंती और घटना में प्रयुक्त लाल मिर्च पाउडर बरामद किया है। पूछताछ में पुलिस ने पुरानी रंजिश और आगामी प्रधानी चुनाव से जुड़ी दुश्मनी का एंगल सामने आने की बात कही है। हत्याकांड में त्वरित गिरफ्तारी पुलिस की कार्रवाई का महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन अब असली परीक्षा विवेचना की है। घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य, बरामदगी, गवाहों के बयान और तकनीकी साक्ष्यों को जोड़कर घटना की पूरी कड़ी स्थापित करना पुलिस के सामने अगला लक्ष्य होगा। वैसे भी किसी भी आपराधिक मामले में गिरफ्तारी तभी सार्थक होती है जब जांच साक्ष्य आधारित हो और न्यायालय में आरोपों को मजबूती से साबित करने योग्य सामग्री उपलब्ध हो। इसलिए ब्रह्मानन्द हत्याकांड में अब पुलिस की निगाह विवेचना को मजबूत करने पर होगी।संतकबीरनगर में एसपी संदीप कुमार मीना की हालिया पुलिस गतिविधियों में त्वरित कार्रवाई, तकनीकी पुलिसिंग और जवाबदेही पर जोर दिखाई देता है। जनसुनवाई में फरियादियों की समस्याएं सुनना, अपराध गोष्ठियों में विवेचनाओं की समीक्षा करना और तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल कर मामलों को सुलझाने की दिशा में कार्रवाई करना इसी कार्यशैली का हिस्सा है। ब्रह्मानन्द हत्याकांड में भी पुलिस ने घटना के बाद समय गंवाने के बजाय आरोपियों की तलाश तेज की और गिरफ्तारी तक पहुंची। भगवान श्रीकृष्ण के श्लोक को पुलिस कार्रवाई का प्रत्यक्ष आधार नहीं कहा जा सकता, लेकिन उसका प्रतीकात्मक संदेश जरूर कानून के मूल सिद्धांत से जुड़ता है—कानून सबके लिए समान है और गंभीर अपराध के आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा।
